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HINDI POEM ''एक ही धरातल''

एक ही धरातल   ------------- पट जाती हमारे बीच की खाई   यदि , मिल जाता निश्चित् आवरण   तुम्हारे जैसा वातावरण .   ढल जाती मैं भी उसी साँचे में   जिसमें तुम ढले हो . भिन्नता तनिक न रहती हममें   यदि मैं भी पल , बढ़ जाती   उसी समाज में   जिसमें तुम पले हो .   तुम कैसे ये निर्णय कर लेते हो कि , तुम हर क्षेत्र में आगे हो मुझसे ? किस घमण्ड में तुम निकल जाते हो   मेरे सामने से   सीना फैलाकर , तुच्छ दृष्टिपात कर , नाक , भौंह सिकोड़कर   और गर्व से सिर उठाकर ? क्या यह आधुनिकता ही दर्पण है   सभ्य समाज का ! क्या सारा समय ही है तुम्हारा   आज का ? मेरा तनिक भी नहीं !   तुम ये क्यों सोचते हो - प्रत्यक्ष तुम्हारे मैं लघु बन जाऊँगी   या , मन में अपने हीन भावना लाऊँगी   मैं तो प्रत्यक्ष प्रभु के सौ - सौ बार   बस , सादा जी...

TERCET-THREE LINES GARHWALI POEMS (81-85)

---81--- जाति-भेद करी आपस मs लड़ै गेन अफु बण गेन सुपन्यों का राजा हमsरा सुपन्या भी चोरि गेन Copyright © सतीश रावत 21/08/2016 ---82--- मोल-भौ नि करणूँ अपणौं दगड़ कुछ चीज़ सस्ति, कुछ मैंगि होंदिन पर अपणा तs अपणा ही होंदिन Copyright © सतीश रावत 23/08/2016 ---83--- वूँन कुंगळि डाळि कु टुक्कु चूँडि द्या द्वी-चार दिन मs औरि छौंका फुटि गेन डाळि और भी झपन्यळि ह्वे ग्या Copyright © सतीश रावत 23/08/2016 ---84--- रचण पोड़लि एक नयी कथा लीण पोड़लु एक नयु अवतार म्यारा प्रभु तुमथैं एक और बार Copyright © सतीश रावत 24/08/2016 ---85--- जीण अगर हमथैं ऐ जाँदू खुस्यूँ कु ड्वारू भुर्यूँ राँदु जीवन, खाली बन्ठा-सि नि हिलणू राँदु Copyright © सतीश रावत 24/08/2016 TERCET - THREE LINES GARHWALI POEMS, Sociopolitical Satirical, Current Event depicting,  Garhwali Poems, Folk Songs , verses from Garhwal, Uttarakhand;  Sociopolitical Satirical, Current Event depicting, Garhwali Poems, Folk Songs , verses from Pauri Garhwal, Uttarakhand ;  Sociopolitical...

GARHWALI POEM ''बड़ु मन''

बड़ु मन  -------- छुटऽ मनऽ लऽ कबि  बड़ऽ काम नि होंदा,  सियीं आँख्यूँ का कबि  सुपन्य सच नि होंदा,    बड़ा मनखि से बड़ु  मन होंद,  बड़ऽ मनऽ लोग कबि  छुटा नि होंदा,    बिजी आँख्यूँ तैं  द्वी घड़ि खूब निंद आँद,  सियीं आँख्यूँ कि  निंद हर्चि जाँद,    पसीना बौगाण वळौं कि  कबि हार नि ह्वाई,  स्वाणा मनऽ भलऽ स्वीणा  कबि अधूरा नि राई,    सुपन्यों कि डाळि तैं  पाणि दींदा रावा,  सच ह्वाला सुपन्य एक दिन जरूर  लपाग तऽ  बढ़ावा.    Copyright © सतीश रावत  30/12/2016 Sociopolitical Satirical, Current Event depicting,  Garhwali Poems, Folk Songs , verses from Garhwal, Uttarakhand;  Sociopolitical Satirical, Current Event depicting, Garhwali Poems, Folk Songs , verses from Pauri Garhwal, Uttarakhand ;  Sociopolitical Satirical, Current Event depicting, Garhwali Poems...

HINDI POEM ''कुछ पल मेरे अपने होते''

कुछ पल मेरे अपने होते   -------------------- जीवन के पारावार में   कुछ बूँदें मेरी हो जाएँ   तो मैं पलकें गिरा के अपनी   बस , तुमको ही पढ़ता जाऊँ   सोच - सोचकर तुमको ही मैं , प्यार लूटाऊँ , शांति मैं पाऊँ   नि : शब्द , एकांत वातावरण में   समाकर तुम्हारे आवरण में   जीभर के आँखों से अपनी   जल के बिन्दु गिराता जाऊँ , जल के बिन्दु गिराता जाऊँ .   जीवन की अविराम घड़ी में , कुछ पल मेरे अपने हो जाते   तो मैं भी शांति के कुछ बीज , वंध्या जीवन में बो जाता   आँसू मुझमें , मैं तुममे खो जाता   बस , क्षण तनिक - सा ये रो जाता   तो पार तुम्हारे पारावार ! मैं हो जाता , मैं हो जाता .   बस , केवल हम तीनों होते   आँसू मेरे टप - टप रोते   दिल के अवसादों को धोते   तन - मन में बस तुम ही होते   पास मेरे -  जीवन की वसुन्धरा के  ...