गढ़वळि कविता -8- ''छुटु बाटु'' सतीश रावत, 14/08/2016
छुटु
बाटु
कंक्रीटूँ का जंगळ मs
धुक-धुक करणू छा
एक छुटा रस्ता कु बड़ु दिल,
10-12 मीटर कु ननु बाटु
30-35 डिग्री का कोण फर
जाणू छा नर्सरि मs,
माटा कु कच्चु संगड़ु बाटु
ऊबड़-खाबड़ सीधु बाटु
मुंड मs टकराणा डाळ्यूँ का फौंगा
तीर-ढीस जम्यूँ औड़ौ
माटा अर् घास की मिठि-मिठि खुशबू
खुद लगै ग्या पहाड़ की.
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© सतीश रावत
14/08/2016
14/08/2016
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