GARHWALI POEM ''ताकत'' BY SATISH RAWAT ''DURAL''
ताकत
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चुप बैठी क्वी
काम नि होंद
दुनिया घचकाणी
रा, तऽ आराम नि होंद
जब गौळा- गौळा
ऐ जा
तब जरूरि ह्वे
जाँद
जवाब देण
जब फन उठाँद
साँप कटणऽ खुण
तब वेका अगना
दूधै कट्वरि
नि रखे जाँद
वेकि मुँडळि
गम बूटूँ नऽ
कुर्चे जाँद
कबि-कबि जरूरी
ह्वे जाँद
जहरीला कीड़ा-मक्वड़ों
थैं
वूँकि औकात बताण
कबि-कबि जरूरि
ह्वे जाँद
दुन्या थैं अपणि
ताकत दिखाण.
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सतीश रावत
02/10/2016
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