HINDI POEM ''नया सवेरा'' BY SATISH RAWAT ''DURAL''
नया सवेरा
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तुम पर टिका
हुआ नभ
कितने खेल खेलता
है
तुम्हारे साथ ;
कितने रंग बदलता
है
और तुम भोले
भाले
रंग जाते हो
पूर्णतः
उसके रंगों में ;
तुम विशाल और उदात्त
होते हुए भी
बह जाते हो
,
उसकी हल्की मुस्कान की
उर्मियों के संग
जब उसका नीला
वसन
रंग जाता है
विविध रंगों के
छींटों से
घेर लेती है
लालिमा
मिलन रेखा को
और तुम्हारे अधरों से
उत्सर्जित होने लगती
है आभा
विकसित होने लगता
है
तुम्हारे प्यार का पुष्प
पूरव दिशा से
शनै-शनै ;
और तुम्हारा गौरव इन
हरे-हरे पेड़ों
से
छानकर बिखेर देता है
रश्मियाँ
वसुन्धरा के अंक
में
और अम्बर के विस्तार
में
तब तुम्हारे उर से
उदित ऊर्जा
ले आती है
एक नया सवेरा
कण-कण के
जीवन में
और पुनः रंग
जाते हो तुम
नभ के सुनहरे
प्रकाश में
और तुम्हारी तुंग चोटियाँ
खिल उठती हैं
एक बार फिर
स्पर्श उसका पाकर.
Copyright © सतीश
रावत
12/03/2001गढ़वाल , उत्तराखंड ,हिमालय से गढ़वाली कविताएं , गीत ; पौड़ी गढ़वाल , उत्तराखंड ,हिमालय से गढ़वाली कविताएं , गीत ; चमोली गढ़वाल , उत्तराखंड ,हिमालय से गढ़वाली कविताएं , गीत ; रुद्रप्रयाग गढ़वाल , उत्तराखंड ,हिमालय से गढ़वाली कविताएं , गीत ; टिहरी गढ़वाल , उत्तराखंड ,हिमालय से गढ़वाली कविताएं , गीत ; उत्तरकाशी गढ़वाल , उत्तराखंड ,हिमालय से गढ़वाली कविताएं , गीत ; देहरादून गढ़वाल , उत्तराखंड ,हिमालय से गढ़वाली कविताएं , गीत ; हरिद्वार गढ़वाल , उत्तराखंड ,हिमालय से गढ़वाली कविताएं , गीत ; Ghazals from Garhwal, Ghazals from Uttarakhand; Ghazals from Himalaya; Ghazals from North India; Ghazals from South Asia, Couplets in Garhwali, Couplets in Himalayan languages , Couplets from north India, Hindi Poems.

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