HINDI POEM ''तुम्हारा इंतजार'' BY SATISH RAWAT
तुम्हारा इंतजार
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पुष्पों की पंखुड़ियों
में
ढूँढता हूँ तुम्हारा
चेहरा
देखता हूँ निर्निमेष
गदराये हुए यौवन
से
उड़ते हुए पराग-कण ,
टपकता हुआ मकरन्द
और देखता ही जाता
हूँ
सोचता ही जाता
हूँ
औचक खो जाती
है मेरी दृष्टि
टहलने लगता हूँ
कल्पनाओं के कानन
में
और ढूँढने लगता हूँ
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सिहरती पत्तियों में
घने अंधकार में
झरने की ऊँचाई
में
और पारावार की गहराई
में
तुम्हारा अदृष्ट कल्पनिक रूप.
ओ मेरे होने
वाले प्यार !
जब लौट के
आता हूँ
यथार्थ के धरातल
पर
तो प्रफुल्ल प्रसून की
मुड़ी हुई पंखुड़ियों
को
तुम्हारी मुँदी हुई पलकें
समझकर
चूम लेता हूँ
प्यार से
और करने लगता
हूँ तुम्हारा इंतजार
ओ मेरे ,
अप्रतिम , अपेक्षित , अनदेखे प्यार
!
बस , तुम्हारा ही इंतजार.
Copyright © सतीश
रावत
11/03/2001
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