HINDI POEM ''बच्चा''
बच्चा
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बच्चा तो बच्चा
है !
बच्चा -
मासूम, निश्छल, कोमल, अभिराम
राम,
हाँ-हाँ राम
!
देखी है कभी
मुख मण्डल पर
पटुता ?
वाणी में कटुता
?
आँखों में छल,
और मन में
मल ?
सोचा क्या,
क्या है उसकी
जिजीविषा ?
ना रे, ना,
ना !
वह तो बस
सोचा करता है
उस कल्पक को अनुक्षण;
किसी का भी
हो
कोई भी हो
कैसा भी हो
बच्चा तो बच्चा
ही है ना
!
पशु-पक्षी या मानव
का हो
देव या फिर
दानव का हो
कृति कोमल उस
कल्पक की ही
है
फिर क्यों दुतकारा उस
पिल्ले ?
क्यों चूम लिया
अपने बच्चे को
?
अन्तर ही क्या
था दोनों में
!
दोनों ही तो
थे भगवान मेरे.
Copyright © सतीश
रावत
16/03/2001
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