HINDI POEM ''तुम तक कैसे आऊँ मैं''
तुम तक कैसे
आऊँ
मैं
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काया को अब
तक जान न
पाया
माया ने लूटा
और लुटाया
अंतरतम को अवसादों
ने घेरा
भटक रहा है
ढूँढ रहा है
किसको हे चिन्मय,
ये मन मेरा
?
कौन खड़ा है
मेरे आगे
क्यों देख नहीं
सकता मैं उसको
अकुलाता है कोई
मेरे अन्दर
कैसे उसको मैं
समझाऊँ
गीत प्रीति के कैसे
गाऊँ
कैसे उसकी प्यास
बुझाऊँ ?
जीवन बहता
क्यों रुका हुआ
मैं
बीच भँवर में
फँसा हुआ मैं
किस विधि बाहर
आऊँ मैं,
बतला दो हे
परमेश्वर !
वर कैसे तुमसे
पाऊँ मैं ?
चाह है मेरी
-
निर्झर बन
झर-झरकर तुम
तक आ जाऊँ
केवल गीत तुम्हारे
गाऊँ
देखूँ तो बस,
तुमको ही पाऊँ
अब जान गया
हूँ
तुमको स्वामी
पहचान गया हे
अन्तर्यामी !
अब क्यों अपना
समय गवाऊँ
बतला दो कैसे
तुम तक आऊँ
!
Copyright © सतीश
रावत
19/03/2001गढ़वाल , उत्तराखंड ,हिमालय से गढ़वाली कविताएं , गीत ; पौड़ी गढ़वाल , उत्तराखंड ,हिमालय से गढ़वाली कविताएं , गीत ; चमोली गढ़वाल , उत्तराखंड ,हिमालय से गढ़वाली कविताएं , गीत ; रुद्रप्रयाग गढ़वाल , उत्तराखंड ,हिमालय से गढ़वाली कविताएं , गीत ; टिहरी गढ़वाल , उत्तराखंड ,हिमालय से गढ़वाली कविताएं , गीत ; उत्तरकाशी गढ़वाल , उत्तराखंड ,हिमालय से गढ़वाली कविताएं , गीत ; देहरादून गढ़वाल , उत्तराखंड ,हिमालय से गढ़वाली कविताएं , गीत ; हरिद्वार गढ़वाल , उत्तराखंड ,हिमालय से गढ़वाली कविताएं , गीत ; Ghazals from Garhwal, Ghazals from Uttarakhand; Ghazals from Himalaya; Ghazals from North India; Ghazals from South Asia, Couplets in Garhwali, Couplets in Himalayan languages , Couplets from north India, Hindi Poems.

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