हिंदी बाल कविता, -1-, अब उठ जाओ, सतीश रावत, 16/03/2001


-1-
अब उठ जाओ

प्यारी-प्यारी चिड़िया आओ
गाकर मीठा राग सुनाओ.
देखो तो सूरज की लाली
नाच रही किरणें मतवाली.

सुंदर-सुंदर फूल खिले हैं
देखो, कितने हिले-मिले हैं.
भौंरे गूँ-गूँ गुंजन करते
पर देखो तो मुझसे डरते.

सुंदर शीतल हवा सुहानी
नाना खुशबू लाती रानी.
हरे-हरे पौधे मुस्काते
देखो तो सब मिलकर गाते.

कितना सुंदर स्वर्ण-सवेरा
पल भर का है इसका डेरा.
प्यारे भैया ! अब उठ जाओ
इस प्यारे क्षण को यूँ न गँवाओ.

Copyright © सतीश रावत
16/03/2001




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