गढ़वळि कविता, -46-, जीवन अर शब्द, सतीश रावत

-46-

जीवन अर शब्द 

जीवन क्या छ ?
शब्दूँ कु मायाजाळ छ.
शब्द, कभि बिंगण मा अँदिन
पर पछ्यण मा नि अँदिन
अर कभि पछ्यण मा अँदिन
पर बिंगण मा नि अँदिन
कभि कित्गा सरल
अर कभि कित्गा कठिन ह्वे जँदिन
कभि कित्गा बोलीऽ भि चुप रँदिन
अर कभि चुप रैकि भि कित्गा बोल जँदिन
कभि कठा ह्वेकि जीवनै माळा का फूल बण जँदिन
कभि माळा कु धागु बणी जीवन गँठे जँदिन
सुचणा रा, डुबणा रा; गैरा, गैरा अर गैरा हूँणा रँदिन
भगवान जी का दर्शन करँदिन
जीवन का आधार शब्द
कभि अफी जीवन बण जँदिन.

Copyright © सतीश रावत
11/02/2018


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