गढ़वळि कविता, -55-, मैंगु सेकेंड, सतीश रावत, 31/12/2018
-55-
मैंगु सेकेंड
कबि सर्या साल रैंद
कबि सर्या मैना रैंद
कबि सर्या दिन रैंद
कबि सर्या घंटा रैंद
कबि सर्या मिनट रैंद
अर कबि सालाऽ कुछ सेकेंड रंदिन
हम दगड़
जु हम निपटै देंदा
वु हमारु ह्वे जाँद
भ्वाळ फरौ अगना रड़कि जाँद
झणि कब सालौ वु मैंगु सेकेंड भि बीत जाँद
फिर एक नयु साल
एक सर्या साल
हमतैं एक नयु अवसर दे जाँद.
Copyright © सतीश रावत
31/12/2018
Tags for Poems, Garhwali -
गढ़वळि कविता, गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems, सतीश रावत, Satish Rawat, सतीश रावत कि कविता, सतीश रावत की कविताएं, Poems of Satish Rawat, सतीश रावत, नौड़ियाल गाँव, कफोलस्यूं, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड, भारत, Satish Rawat, Nauriyal Gaon, Kapholsyun, Pauri Garhwal, Uttarakhand, India, गढ़वळि साहित्य, गढ़वाली साहित्य, Garhwali Literature, गढ़वळि साहित्य कवि, गढ़वळि साहित्य कवि, Garhwali Literature Poets, गढ़वळि साहित्य लेखक, गढ़वाली साहित्य लेखक, Garhwali Literature Writers, गढ़वळि कवि, गढ़वाली कवि, Garhwali Poets, गढ़वळि लेखक, गढ़वाली लेखक, Garhwali Writers, गढ़वळि भाषा, गढ़वाली भाषा, Garhwali Language,

Comments
Post a Comment