गढ़वळि कविता, -56-, लाल बत्ति, सतीश रावत, 10/01/2019
-56-
लाल बत्ति
गाड़्यूं का तेज घुमदा टैर
हॉर्नूं कि ऐड़ांदि आवाज़
आँख्यूं तैं दुखांदु,
जिकुड़ि तैं कौंपांदु,
शरीर तैं उज्यांदु—
प्रदूषण
दौड़ा-दौड़
अगना बढ़णै होड़
क्वी अगना सरकणू
क्वी पिछना भगणू
कुज्याण कख जाणी होलि?
कित्गा तेज दौड़णी—
जिंदगी
कभि जिंदगी, गाड़ि बण जांद
अर कभि गाड़ि बण जांद, जिंदगी
कभि सड़क मा कळकळि लगद
अर कभि खुंखरि पळ्ये कि तैयार रैंद मनखि
कभि ढुंगा भि बण जंदिन खूबसूरत ताजमहल
अर कभि मनखि बण जंदिन—
ढुंगा
गाड़ीऽ खिड़कि भटी ताळ पोड़ जांद
ननि नौनीऽ गुड़िया
पिछना भटी तेज रफ्तार मा आंदि गाड़ि
पतेड़ देंदिन वींकि गुड़ियऽ तैं
ट्रैफिक चलणू रांद
ननि गुड़िया गाड़ी खिड़कि भटी भैर पिछना देखीऽ
अपणि गुड़िया तैं खुज्यांद
दुनिया अगना बढ़णी रांद
क्वी नि रुकदु
क्वी लाल बत्ति होणो इंतजार करद
अर क्वी लंघै जांद—
लाल बत्ति.
Copyright © सतीश रावत
10/01/2019
Tags for Poems, Garhwali -
गढ़वळि कविता, गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems, सतीश रावत, Satish Rawat, सतीश रावत कि कविता, सतीश रावत की कविताएं, Poems of Satish Rawat, सतीश रावत, नौड़ियाल गाँव, कफोलस्यूं, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड, भारत, Satish Rawat, Nauriyal Gaon, Kapholsyun, Pauri Garhwal, Uttarakhand, India, गढ़वळि साहित्य, गढ़वाली साहित्य, Garhwali Literature, गढ़वळि साहित्य कवि, गढ़वळि साहित्य कवि, Garhwali Literature Poets, गढ़वळि साहित्य लेखक, गढ़वाली साहित्य लेखक, Garhwali Literature Writers, गढ़वळि कवि, गढ़वाली कवि, Garhwali Poets, गढ़वळि लेखक, गढ़वाली लेखक, Garhwali Writers, गढ़वळि भाषा, गढ़वाली भाषा, Garhwali Language,

Comments
Post a Comment