गढ़वळि कविता, -38-, पलायन कु सुख
-38-
पलायन कु सुख
------------------
क्या वु नि
चाँद,
कि वेकु भि विकास ह्वा?
वे तैं भि वु सुख-सुविधा मिलिन,
जु विकसित देशूँ का लुखूँ तैं मिलदिन.
वेका नौना-बाळौं तैं नि भुगण प्वाड़ वु दुख
जु वेन भ्वाग.
वू भि चाँद कि वेका नौना-बाळौं तैं भि
सुख-सुविधा अर मौका मीलु-
अच्छा शैक्षणिक संस्थानूँ मा पढ़णौ कु,
दुनिया दगड़ चलणौ कु,
अगना बढणौ कु.
क्या वु नि चाँद!
कि वेका भि दिन ऐन,
खूब ठाट-बाट रैन.
वेकि भि क्वी पछ्याँण ह्वा,
कुछ योगदान वू भि दे साक संसार कि प्रगति मा,
वेकु भि नाम लिखे जाव इतिहास का पन्नौं मा.
वु कैसे कम नी छ
वु भि जीत सकद दुनिया तैं
वेमा ताकत छ दुनिया से भि अगनै चलणै की
पर पिड़ा य छ-
संसाधन ही नि छन.
अब बैठ- बैठी करण भि च त क्य कन?
कनुकै चलण दुनिया जन?
इलै वे तैं हिलण प्वाड़,
ब्वे-बुबै खुचलि छुड़ण प्वाड़,
अपणु भाग लँफ्याण प्वाड़,
वेन स्वाच-
भलु ह्वालु भ्वाळ,
राजि-खुसि राला गौं-गुठ्यार,
संसाधन आला अपणा ड्यार,
इलै वेन पलायन कार.
Copyright
© सतीश रावत
24/12/2017
Tags for Poems, Garhwali - गढ़वळि कविता, गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems, सतीश रावत, Satish Rawat, सतीश रावत कि कविता, सतीश रावत की कविताएं, Poems of Satish Rawat, सतीश रावत कि गढ़वळि कविता, सतीश रावत की गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems of Satish Rawat, सतीश रावत, नौड़ियाल गाँव, कफोलस्यूं, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड, भारत, Satish Rawat, Nauriyal Gaon, Kapholsyun, Pauri Garhwal, Uttarakhand, India, गढ़वळि साहित्य, गढ़वाली साहित्य, Garhwali Literature, गढ़वळि साहित्य कवि, गढ़वळि साहित्य कवि, Garhwali Literature Poets, गढ़वळि साहित्य लेखक, गढ़वाली साहित्य लेखक, Garhwali Literature Writers, गढ़वळि कवि, गढ़वाली कवि, Garhwali Poets, गढ़वळि लेखक, गढ़वाली लेखक, Garhwali Writers, गढ़वळि भाषा, गढ़वाली भाषा, Garhwali Language.
Comments
Post a Comment