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गढ़वळि कविता, -61-, एक

  -61-   एक  ----- सब कुछ त समाहित छ एक मा  एक से मथि क्या छ !  ज्ञान, विज्ञान अर सैरु संसार  क्या एक से अलग छ !    जु दिखेणू छ प्रत्यक्ष  या जैकु हमतैं अहसास होंद  या जै तैं हम महसूस ही नि कर सकदां  वु सब क्या छ !    कबि बदल जंदिन भौगोलिक स्थिति  अर कबि बदल जंदिन भौतिक रूप  कबि सांख्यिकीय आंकड़ौं कि व्याख्या करे जांद  अपणा-अपणा अनुसार  अर कबि प्रतिशत का जाळ मा फंसये जंदिन  भोला-भाला मनखी    कबि मनखी तैं बतये जांद एक से अलग  कबि गणित से मथि भि होंद गणना  कबि एक जमा एक बराबर होंद एक  कबि एक घटा एक बराबर भी एक होंद. Copyright © सतीश रावत   09/03/2020 Tags for Poems, Garhwali - गढ़वळि कविता, गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems, सतीश रावत, Satish Rawat, सतीश रावत कि कविता, सतीश रावत की कविताएं, Poems of Satish Rawat, सतीश रावत कि गढ़वळि कविता, सतीश रावत की गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems of Satish Rawat, सतीश रावत, नौड़ियाल गाँव, ...

GARHWALI HAIKU (56-60)

  -56- सुपन्या त्वाड़ कैका बाँठौ पहाड़ बैठ्यूँ  वे  छ्'वाड़ Copyright © सतीश रावत 13/01/2019 -57- उडणू राँद अगास मा बादळ आँखा घुर्यांद Copyright © सतीश रावत 13/01/2019 -58- बसगाळऽम पुळ डरणू राँद  निंद नि आँद Copyright © सतीश रावत 13/01/2019 -59- पहाड़ै हवा कै तैं खुज्याणी होलि यूँ मैदानूँ मा Copyright © सतीश रावत 13/01/2019 -60- पूषऽ कु मैना घाम तपणा दिन मनख्यूँ बिन Copyright © सतीश रावत 13/01/2019 Garhwali Haiku, Sociopolitical Satirical, Current Event depicting,  Garhwali Poems, Folk Songs , verses from Garhwal, Uttarakhand;  Sociopolitical Satirical, Current Event depicting, Garhwali Poems, Folk Songs , verses from Pauri Garhwal, Uttarakhand ;  Sociopolitical Satirical, Current Event depicting, Garhwali Poems, Folk Songs , verses from Chamoli Garhwal, Uttarakhand ;  Garhwali Poems,  Sociopolitical Satirical, Current Event depicting, Folk Songs , verses from Rudraprayag Garhwal, Uttarakhand ; ...

GARHWALI HAIKU (51-55)

-51- ग्वाया लगै कि खुचलि मा ऐ जाँद  घामऽ कि झैळ  Copyright © सतीश रावत 01/01/2019 -52- अपणा मुल्क कोयल धै लगांद फ्यूंलि शर्मांद Copyright © सतीश रावत 13/01/2019 -53- पहाड़ैऽ पिड़ा गळण बैठ ग्याई वु घौर आयी Copyright © सतीश रावत 13/01/2019 -54- लय्या कि डाळि नज़दीक बुलाणी धौण हिलाणी Copyright © सतीश रावत 13/01/2019 -55- छूणऽ कि आस सीधु-साधु पहाड़ ऊँचु अगास Copyright © सतीश रावत 13/01/2019 Garhwali Haiku, Sociopolitical Satirical, Current Event Depicting, Garhwali Poems, Folk Songs, Verses from Garhwal, Uttarakhand; Sociopolitical Satirical, Current Event Depicting, Garhwali Poems, Folk Songs, Verses from Pauri Garhwal, Uttarakhand; Sociopolitical Satirical, Current Event Depicting, Garhwali Poems, Folk Songs, Verses from Chamoli Garhwal, Uttarakhand; Garhwali Poems, Sociopolitical Satirical, Current Event Depicting,Folk Songs, Verses from Rudraprayag Garhwal, Uttarakhand; Garhwali Poems, Folk Songs, Verses from Tehri Garhwal, Uttarakhand; So...

गढ़वळि कविता, -40-, कोशिश

  -40-   कोशिश --------- अँध्यरु छँटे हि जाँद, टैम बँटे हि जाँद. घाम ऐ हि जाँद, चखुलि च्वींचे हि जाँद. मौसम बदले हि जाँद, ऋतु वसंत ऐ हि जाँद. अगास बरखे हि जाँद, हरियाळि ह्वे हि जाँद. हिटदा-हिटदा बाटु मिल हि जाँद, कोशिश करा कसर किलै जि राँद! Copyright © सतीश रावत 03/01/2018 Tags for Poems, Garhwali - गढ़वळि कविता, गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems, सतीश रावत, Satish Rawat, सतीश रावत कि कविता, सतीश रावत की कविताएं, Poems of Satish Rawat, सतीश रावत कि गढ़वळि कविता, सतीश रावत की गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems of Satish Rawat, सतीश रावत, नौड़ियाल गाँव, कफोलस्यूं, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड, भारत, Satish Rawat, Nauriyal Gaon, Kapholsyun, Pauri Garhwal, Uttarakhand, India, गढ़वळि साहित्य, गढ़वाली साहित्य, Garhwali Literature, गढ़वळि साहित्य कवि, गढ़वळि साहित्य कवि, Garhwali Literature Poets, गढ़वळि साहित्य लेखक, गढ़वाली साहित्य लेखक, Garhwali Literature Writers, गढ़वळि कवि, गढ़वाली कवि, Garhwali Poets, गढ़वळि लेखक, गढ़वाली लेखक, Garhwali Writers, गढ़वळि भाषा, गढ़वाली भाषा, Gar...

गढ़वळि कविता, -39-, नयु दिन

  -39-   नयु दिन ----------- बिनसरि होंद रात बिजि जाँद सुबेर उठि जाँद चखुलि च्वींच्याँद घाम आँद बाछि रमऽद गौड़ि गुस्याँण खुज्याँद ताँबै गागर चमकि जाँद चुला मा चा उमळणी राँद मिठि-मिठि धै सुण्याँद स्कूलै घंटि बुलाणी राँद पुँगड़ौं मा दगड़्या छ्वीं लगाँद बेटि-ब्वारि घास-लखड़ु लाँद ढबऽड़ि रूठीऽ खुशबु आँद इस्कुल्या नौना-बाळौं कि खुशी सुण्याँद खेल नौना-बाळौं दगड़ खिलणू राँद चकुंडै डाळि उंगण बैठ जाँद सुरुक-सुरुक रुमुक आँद फूल-फटकी जून आँद गैणौं दगऽड़ खिलणी राँद हँसदा-हँसदा रात से जाँद नयु दिन बाटु जग्वळणू राँद नयु मौका दीण चाँद. Copyright © सतीश रावत 31/12/2017 Tags for Poems, Garhwali - गढ़वळि कविता, गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems, सतीश रावत, Satish Rawat, सतीश रावत कि कविता, सतीश रावत की कविताएं, Poems of Satish Rawat, सतीश रावत कि गढ़वळि कविता, सतीश रावत की गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems of Satish Rawat, सतीश रावत, नौड़ियाल गाँव, कफोलस्यूं, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड, भारत, Satish Rawat, Nauriyal Gaon, Kapholsyun, Pauri Garhwal, Uttarakhand, India, गढ़...

गढ़वळि कविता, -38-, पलायन कु सुख

  -38-   पलायन कु सुख ------------------   क्या वु नि चाँद,  कि वेकु भि विकास ह्वा? वे तैं भि वु सुख-सुविधा मिलिन,  जु विकसित देशूँ का लुखूँ तैं मिलदिन. वेका नौना-बाळौं तैं नि भुगण प्वाड़ वु दुख जु वेन भ्वाग. वू भि चाँद कि वेका नौना-बाळौं तैं भि सुख-सुविधा अर मौका मीलु- अच्छा शैक्षणिक संस्थानूँ मा पढ़णौ कु, दुनिया दगड़ चलणौ कु, अगना बढणौ कु. क्या वु नि चाँद! कि वेका भि दिन ऐन, खूब ठाट-बाट रैन. वेकि भि क्वी पछ्याँण ह्वा,   कुछ योगदान वू भि दे साक संसार कि प्रगति मा,  वेकु भि नाम लिखे जाव इतिहास का पन्नौं मा.  वु कैसे कम नी छ वु भि जीत सकद दुनिया तैं वेमा ताकत छ दुनिया से भि अगनै चलणै की  पर पिड़ा य छ- संसाधन ही नि छन. अब बैठ- बैठी करण भि च त क्य कन?  कनुकै चलण दुनिया जन? इलै वे तैं हिलण प्वाड़, ब्वे-बुबै खुचलि छुड़ण प्वाड़, अपणु भाग लँफ्याण प्वाड़, वेन स्वाच- भलु ह्वालु भ्वाळ, राजि-खुसि राला गौं-गुठ्यार, संसाधन आला अपणा ड्यार, इलै वेन पलायन कार. Copyright © सतीश रावत 24/12/2017 Tags fo...

गढ़वळि कविता, -37- सच्चु बचपन

-37- सच्चु बचपन -------------- कभि हँसदु, कभि हँसाँदु; कभि रूँदु, कभि रुवाँदु; कभि ख्यलदु, कभि रुसाँदु; कभि डरदु, कभि डराँदु; कभि हरदु, कभि हराँदु; छुटि आँख्यूँ मा बड़ा सुपन्य, सजाणू राँदु; कित्गा मयळ्दु, कित्गा सच्चु, कित्गा स्वाणु, कित्गा अच्छु, हूँद बचपन. Copyright © सतीश रावत 13/06/2017 Tags for Poems, Garhwali - गढ़वळि कविता, गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems, सतीश रावत, Satish Rawat, सतीश रावत कि कविता, सतीश रावत की कविताएं, Poems of Satish Rawat, सतीश रावत कि गढ़वळि कविता, सतीश रावत की गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems of Satish Rawat, सतीश रावत, नौड़ियाल गाँव, कफोलस्यूं, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड, भारत, Satish Rawat, Nauriyal Gaon, Kapholsyun, Pauri Garhwal, Uttarakhand, India, गढ़वळि साहित्य, गढ़वाली साहित्य, Garhwali Literature, गढ़वळि साहित्य कवि, गढ़वळि साहित्य कवि, Garhwali Literature Poets, गढ़वळि साहित्य लेखक, गढ़वाली साहित्य लेखक, Garhwali Literature Writers, गढ़वळि कवि, गढ़वाली कवि, Garhwali Poets, गढ़वळि लेखक, गढ़वाली लेखक, Garhwali Writers, गढ़वळि भाषा, गढ़वाली भाषा...

गढ़वळि कविता, -36- गौं कित्गा बदलेगे

  -36-  गौं कित्गा बदलेगे --------------- अब तऽ गौंऊँ मा भि व बात नि रैगे, पैलि जन भै-भयात व मनख्यात नि रैगे. उपरि-उपरि-सि दिखेणा छन लोग-बाग, नै जमऽनै सका-सैर्यूंऽ कन औडुळ ऐगे. माटा मनखीऽ सिक्कि चुप्फा मा धरी छन, हिरणू मथी-मथि, माटा से एलर्जी ह्वेगे. बड़ा मनख्यूँ तैं दिखाणै जरूरत नि पुड़द, द्वी कौड़ीऽ अफुतैं धन्नासेठ चितैगे. अफुतैं भलु बताणौ, करणू औरूँ काट, मूर्ख बिना सोच-समझी भकलौंण मा ऐगे. प्रकृतीऽ प्यारा मनखी क्य ह्वा त्वे तैं, मॉडर्न बणणा चक्कर मा बौळ्या ह्वेगे. प्रकृति तऽ छ पैलि जन हि स्वाणि, मनखी मन म्वासु-सि झणि किलै ह्वेगे. सुचुदु छा गौं दूर ह्वाला दिखावा से, पर अब दिखदु कि गौं कित्गा बदलेगे. Copyright © सतीश रावत 12/06/2017 Tags for Poems, Garhwali - गढ़वळि कविता, गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems, सतीश रावत, Satish Rawat, सतीश रावत कि कविता, सतीश रावत की कविताएं, Poems of Satish Rawat, सतीश रावत कि गढ़वळि कविता, सतीश रावत की गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems of Satish Rawat, सतीश रावत, नौड़ियाल गाँव, कफोलस्यूं, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड, भारत, Sat...

गढ़वळि कविता, -41- अपणा, सतीश रावत

-41- अपणा  -------  द्वी बचन प्यार का, अपणौं दगड़ ब्वाला त सही;  हळ्कु ह्वे जालु प्राण भौत, मन कि गेड़ ख्वाला त सही.  टुट्याँ धागौं तैं जोड़ी, रिश्तौं कि माळा गंठ्यावा त सही;  गेड़ लुकि जालि सबि, फूलूँ मा रस खुज्यावा त सही.  खुट्यूँ मा खुटि धैरी बैठ्याँ नि रावा, बुरयूँ दगड़ लाड़ा त सही;  ताकतवर त तुम बि छाँ, यीं ताकत तैं जरा पाढ़ा त सही.  मि, मि अर मि भौत ह्वे ग्या, ये मि तैं अब त्वाड़ा त सही;  ताकत त हम मा हि होंद, इतिहास जना धौंण म्वाड़ा त सही.  दम घुटे जालु बुरऽयूँ कु एक दिन, अँध्यरा उबुर यूँ तैं ग्वाड़ा त सही.  जिंदगी स्वाणि ह्वे जालि एक दिन, नखरि आदतूँ तैं छ्वाड़ा त सही.  घौर क्या सुंदर संसार बण जालु, छपछपि ढुंग्यूँ तैं सारा त सही,  जितणौं त सर्या दुनिया पुड़ी छ, अपणौं दगड़ एक दाँ हारा त सही.  Copyright © सतीश रावत  06/01/2018  Tags for Poems, Garhwali - गढ़वळि कविता, गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems, सतीश रावत, Satish Rawat, सतीश रावत कि कविता, सतीश रावत की कविताएं, Poems of Satish Rawat, सतीश रावत कि गढ़व...

English Poem, Little moon

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Little moon O beautiful little moon! Come join to us. Today is my birthday, Let's ride on the bus.  We Shall go to Auli, To see the soft snow. There are beautiful mountains, Do you know?  It is very cold weather, Bring two-three coats. On the way we shall see, Rivers, sheep and goats.  There we shall play with snow, I shall make a white moon. I want to know your size, Please come down soon. Copyright © Satish Rawat 29/05/2020 Tags for Poems, English, Children -  अंग्रेजी बाल कविता, अंग्रेजी कविताएं, English Poems, नना नौना-नौन्यूं खुण अंग्रेजी कविता, अंग्रेजी बाल कविताएं, बच्चों के लिए अंग्रेजी कविताएं, English Poems for Children, सतीश रावत, Satish Rawat, सतीश रावत कि कविता, सतीश रावत की कविताएं, Poems of Satish Rawat, नना नौना-नौन्यूं खुण सतीश रावत कि अंग्रेजी कविता, सतीश रावत की अंग्रेजी बाल कविताएं, सतीश रावत की बच्चों के लिए अंग्रेजी कविताएं, English Poems of Satish Rawat for Children, सतीश रावत, नौड़ियाल गाँव, कफोलस्यूं...

गढ़वळि कविता, -42-, भौत बड़ु छ अगास, सतीश रावत

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-42- भौत बड़ु छ अगास तु ढुँगु छै, पर ढुँगु नि छै तु ढुँगु होंदी त मीन अछेकी लगाण छा छ्वीं त्वेम अपणा सुख-दुख की अर अछेकी सुणण छा त्वेन टक लगैकि लोग डरदा छन ये भ्याळ आण मा कि कुजाण कब यु धार मा धर्यूं भरि-भरी पोड़ घिलमुंडि खैकि लमडि जा पर मीन देखि तु सदानी इनी शांत अर गम्भीर म्यारु मन छै तु मि जब भि त्वे मा बैठदु त मि हर्चि जाँदु तौळ मी तैं भरि-भरी भ्याळ दिखेंद मथि साफ-सुथरु नीलु अगास सबि तरफ़ ऊँची डाँडि-काँठि हरि-भरि डाळि-बोटि मुंडळि हिलाँदि हैरि धास बनि-बनिका फूल रंगमत म्वारा डाळ्यूँ भटी चूँदा फल जोर-जोर से च्वींचाँदा चखुला हँसदा-ख्यलदा खरगोश गदन बौगद हैरु पाणि अर मिठु-मिठु छाळु घाम मि उड़णू हि राँदु प्रकृति दगड़ अर तु झक्वळदि छै मीतैं कि- उठ! अब अबेर ह्वे ग्या सीण दे दुन्या तैं क्य ह्वा अगर दुन्या से ग्या? यु जु एक कतर दिखेणू नीलु अगास यु इत्गै नी छ, जित्गा तु दिखणी छै यु अगास छ भौत बड़ु उठ जा! अब ये अगास देखिकि आदी जन सेळि तेरि जिकुड़ि मा पुड़णी छ उनि एहसास दुन्या तैं भि करादि मि सुचदु छौं- कित्गा ख्याल रखदि तु म्यारु कित्गा अड़ाणी रैंद...

गढ़वळि कविता, -43-, खतम इंतजार, सतीश रावत

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-43- खतम इंतजार फुळे गेन अगास मा रंग डाँडि-काँठि बण गेन नारंगी उचि धारैऽ मुंडळि मा ताँबैऽ गागर-सि हिलणू सूरज छळकेणू सूनौऽ पाणि रुझणी छन जिकुड़ि खुश आँख्यूँ कि मुखड़ि सरमाणी रुमुक रौंतेलु मुलुक सूर्य अस्त खतम इंतजार. Copyright © सतीश रावत 31/01/2018 Tags for Poems, Garhwali -   गढ़वळि कविता, गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems, सतीश रावत, Satish Rawat, सतीश रावत कि कविता, सतीश रावत की कविताएं, Poems of Satish Rawat, सतीश रावत कि गढ़वळि कविता, सतीश रावत की गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems of Satish Rawat, सतीश रावत, नौड़ियाल गाँव, कफोलस्यूं, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड, भारत, Satish Rawat, Nauriyal Gaon, Kapholsyun, Pauri Garhwal, Uttarakhand, India, गढ़वळि साहित्य, गढ़वाली साहित्य, Garhwali Literature, गढ़वळि साहित्य कवि, गढ़वळि साहित्य कवि, Garhwali Literature Poets, गढ़वळि साहित्य लेखक, गढ़वाली साहित्य लेखक, Garhwali Literature Writers, गढ़वळि कवि, गढ़वाली कवि, Garhwali Poets, गढ़वळि लेखक, गढ़वाली लेखक, Garhwali Writers, गढ़वळि भाषा, गढ़वाली भाषा, Garhwali Language,  ...

गढ़वळि कविता, -44-, अहसास, सतीश रावत

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-44- अहसास कुतुब मीनाराऽ टुकु बैठयूँ छ कबूतर वु दिखेंदु त नी छ पर वेका हूणौ अहसास होंद. वु दिखणू छ ताळ बिरऽळौं तैं बिरऽळा दिखेणा त नि छन पर वूँका हूणौ अहसास होंद. वु दिखणू अगास मा गरूड़ूँ का गुट गरूड़ दिखेणा त नि छन पर वूँका हूणौ अहसास होंद. वु अटक्यूँ छ बीच मा त्रिशंकु कि तराँ वु नि दिखण चाणू कुछ भि अर बूज दींद आँखा अब हवा मा उडणा छन वेका पंखूड़ मथि दिखणा छन बिरऽळा ताळ दिखणा छन गरूड़ दिखेंदु त कुछ बि नी छ पर सब अहसास होंद. Copyright © सतीश रावत 31/01/2018 Tags for Poems, Garhwali -   गढ़वळि कविता, गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems, सतीश रावत, Satish Rawat, सतीश रावत कि कविता, सतीश रावत की कविताएं, Poems of Satish Rawat, सतीश रावत कि गढ़वळि कविता, सतीश रावत की गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems of Satish Rawat, सतीश रावत, नौड़ियाल गाँव, कफोलस्यूं, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड, भारत, Satish Rawat, Nauriyal Gaon, Kapholsyun, Pauri Garhwal, Uttarakhand, India, गढ़वळि साहित्य, गढ़वाली साहित्य, Garhwali Literature, गढ़वळि साहित्य कवि, गढ़वळि साहित्य कवि, Garhwali L...

गढ़वळि कविता, -45-, मनखि जनम, सतीश रावत

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-45- मनखि जनम  भौत तपस्या बाद मिल्द मनखि जनम मनखि कऽ भितर छ मन मन कऽ भितर भि मन फिर मन कऽ भितर मन अर मन कऽ भितर मन. भौत मन छन मनखि का कबि दिखेंदु क्वी मन त कबि क्वी मन गिनती कि तराँ अनगिनत मन अंतरिक्ष कि तराँ अनन्त मन खतम हि नि होंदन यु मन. मनखि चुप बैठ्यूँ छ मन खुज्याणू छ मन मन कऽ कई छिल्कौं पुटुग घुन्डा बोटी सियूँ छ मन भौत तपस्या बाद मिल्द मनखि जनम. Copyright © सतीश रावत 02/02/2018 Tags for Poems, Garhwali -   गढ़वळि कविता, गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems, सतीश रावत, Satish Rawat, सतीश रावत कि कविता, सतीश रावत की कविताएं, Poems of Satish Rawat, सतीश रावत कि गढ़वळि कविता, सतीश रावत की गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems of Satish Rawat, सतीश रावत, नौड़ियाल गाँव, कफोलस्यूं, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड, भारत, Satish Rawat, Nauriyal Gaon, Kapholsyun, Pauri Garhwal, Uttarakhand, India, गढ़वळि साहित्य, गढ़वाली साहित्य, Garhwali Literature, गढ़वळि साहित्य कवि, गढ़वळि साहित्य कवि, Garhwali Literature Poets, गढ़वळि साहित्य लेखक, गढ़वाली साहित्य लेखक, Garhwali Li...

गढ़वळि कविता, -46-, जीवन अर शब्द, सतीश रावत

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-46- जीवन अर शब्द  जीवन क्या छ ? शब्दूँ कु मायाजाळ छ. शब्द, कभि बिंगण मा अँदिन पर पछ्यण मा नि अँदिन अर कभि पछ्यण मा अँदिन पर बिंगण मा नि अँदिन कभि कित्गा सरल अर कभि कित्गा कठिन ह्वे जँदिन कभि कित्गा बोलीऽ भि चुप रँदिन अर कभि चुप रैकि भि कित्गा बोल जँदिन कभि कठा ह्वेकि जीवनै माळा का फूल बण जँदिन कभि माळा कु धागु बणी जीवन गँठे जँदिन सुचणा रा, डुबणा रा; गैरा, गैरा अर गैरा हूँणा रँदिन भगवान जी का दर्शन करँदिन जीवन का आधार शब्द कभि अफी जीवन बण जँदिन. Copyright © सतीश रावत 11/02/2018 Tags for Poems, Garhwali -   गढ़वळि कविता, गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems, सतीश रावत, Satish Rawat, सतीश रावत कि कविता, सतीश रावत की कविताएं, Poems of Satish Rawat, सतीश रावत कि गढ़वळि कविता, सतीश रावत की गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems of Satish Rawat, सतीश रावत, नौड़ियाल गाँव, कफोलस्यूं, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड, भारत, Satish Rawat, Nauriyal Gaon, Kapholsyun, Pauri Garhwal, Uttarakhand, India, गढ़वळि साहित्य, गढ़वाली साहित्य, Garhwali Literature, गढ़वळि साहित्य कवि, गढ़वळि...

गढ़वळि कविता, -47-, छैल, सतीश रावत

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-47- छैल छैल मा नि दिख्याँद छैल घाम मा चट दिख्याँद छैल मनखीऽ छैल देखी कुकुरूँ कु पड़ि जाँद किकलाट भुकुण बैठ जँदिन रस्ता रुकुण बैठ जँदिन दौड़ऽण बैठ जँदिन छैलाऽ पिछना छैल तैं पकऽड़दिन, बिल्कदिन, धध्वड़दिन खूनऽल रंग दिंदिन वे तैं पीण बैठ जँदिन वेकु ल्वे चबाण बैठ जँदिन वेकि लुत्गि लुँचुण बैठ जँदिन वेकि हड्गि छैल हर्चि जाँद कुकुर खुश ह्वे जँदिन खून खैकि पागल ह्वे जँदिन अर अपणु हि छैल देखी रिंगण बैठ जँदिन चखुला जोर-जोर से च्वींच्याण बैठ जँदिन घाम अछे जाँद चखुला अपणा घोलूँ मा से जँदिन मनखि अपणा घौर चल जाँद. Copyright © सतीश रावत 13/02/2018 Tags for Poems, Garhwali -   गढ़वळि कविता, गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems, सतीश रावत, Satish Rawat, सतीश रावत कि कविता, सतीश रावत की कविताएं, Poems of Satish Rawat, सतीश रावत कि गढ़वळि कविता, सतीश रावत की गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems of Satish Rawat, सतीश रावत, नौड़ियाल गाँव, कफोलस्यूं, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड, भारत, Satish Rawat, Nauriyal Gaon, Kapholsyun, Pauri Garhwal, Uttarakhand, India, गढ़वळि साहित्य, गढ़वाली ...

गढ़वळि कविता, -48-, सोच, सतीश रावत

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-48- सोच जीवन क्या छ! जु चलणू छ, क्य वी जीवन छ? य याँका पिछना जु दिखेणू नी छ, वु जीवन छ? बिजी आँख्यूँन जब दिखेंद संसार, क्य वी जीवन छ? य जब द्वी घड़ि से कि दूर ह्वे जँद्वा संसार से, वु जीवन छ? जु छैं छ वु जीवन छ? य जु छैं ही नी छ, वु जीवन छ? य जीवन कुछ हौरी-हौर छ? बतावा न भगवान जी! जीवन क्या छ? कभि सीधि रेखा-सि अनन्त तक विस्तार छ, कभि अळझ्या धागा-सि क्वी ओर-न-छोर छ, कभि सरल, कभि कठिन, कभि एक रहस्य छ बतावा न ठाकुर जी! जीवन क्या छ? मन कि सोच य दिमाग कि सोच छ? यूँ द्वियूँ कु मिलन सुन्दर संजोग छ बतावा न भगवान ठाकुर जी! क्य यु ही जीवन छ? Copyright © सतीश रावत 05/03/2018 Tags for Poems, Garhwali -   गढ़वळि कविता, गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems, सतीश रावत, Satish Rawat, सतीश रावत कि कविता, सतीश रावत की कविताएं, Poems of Satish Rawat, सतीश रावत कि गढ़वळि कविता, सतीश रावत की गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems of Satish Rawat, सतीश रावत, नौड़ियाल गाँव, कफोलस्यूं, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड, भारत, Satish Rawat, Nauriyal Gaon, Kapholsyun, Pauri Garhwal, Uttara...

गढ़वळि कविता, -49-, सूनि गरूड़, सतीश रावत

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-49- सूनि गरूड़ दूर अगास मा रिटणा छन गरूड़ तौळ ऊँचि-निसि डाँडि-काँठ्यूँ मा ख्यलणा छन चखुला बनि-बनि का खेल दिखणा छन सुपिन्या हूणि-खाणि का बिन्डि छन चखुला, जरा छन गरूड़ लमडणा छन भ्याळ उंद बनि-बनि का सुपिन्या मौज मनाणा छन म्वाटा गरूड़ डाँडि-काँठि बि हकबक रै गेन गरूड़ उपऽड़णा छन ऊँका कँदूड़ चखुलौं कु च्वींच्याट मचि ग्या कठा ह्वे गेन सबि गरूड़ कौंपि ग्या क्याळै डाळि नीला अगास मा दिखे ग्या सूनि गरूड़. Copyright © सतीश रावत 25/03/2018 Tags for Poems, Garhwali -   गढ़वळि कविता, गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems, सतीश रावत, Satish Rawat, सतीश रावत कि कविता, सतीश रावत की कविताएं, Poems of Satish Rawat, सतीश रावत कि गढ़वळि कविता, सतीश रावत की गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems of Satish Rawat, सतीश रावत, नौड़ियाल गाँव, कफोलस्यूं, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड, भारत, Satish Rawat, Nauriyal Gaon, Kapholsyun, Pauri Garhwal, Uttarakhand, India, गढ़वळि साहित्य, गढ़वाली साहित्य, Garhwali Literature, गढ़वळि साहित्य कवि, गढ़वळि साहित्य कवि, Garhwali Literature Poets, गढ़वळि साहित्य ल...

गढ़वळि कविता, -50-, कुंगळु बचपन, सतीश रावत

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-50- कुंगळु बचपन पार्क मा सयऽणौं तैं घुमणौ हैरु दुबलु चयेणू छ नना नौना बाळौं तैं खिलणौ मैदान चयेणू छ माटाल भुरेण से बचण चाणी छ दिखावटी दुनिया खुटौंऽ ताळ कुंगळु बचपन कुरचेणू छ. Copyright © सतीश रावत 15/04/2018 Tags for Poems, Garhwali -   गढ़वळि कविता, गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems, सतीश रावत, Satish Rawat, सतीश रावत कि कविता, सतीश रावत की कविताएं, Poems of Satish Rawat, सतीश रावत कि गढ़वळि कविता, सतीश रावत की गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems of Satish Rawat, सतीश रावत, नौड़ियाल गाँव, कफोलस्यूं, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड, भारत, Satish Rawat, Nauriyal Gaon, Kapholsyun, Pauri Garhwal, Uttarakhand, India, गढ़वळि साहित्य, गढ़वाली साहित्य, Garhwali Literature, गढ़वळि साहित्य कवि, गढ़वळि साहित्य कवि, Garhwali Literature Poets, गढ़वळि साहित्य लेखक, गढ़वाली साहित्य लेखक, Garhwali Literature Writers, गढ़वळि कवि, गढ़वाली कवि, Garhwali Poets, गढ़वळि लेखक, गढ़वाली लेखक, Garhwali Writers, गढ़वळि भाषा, गढ़वाली भाषा, Garhwali Language, 

गढ़वळि कविता, -51-, हैंकु ग्रह, सतीश रावत

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-51- हैंकु ग्रह   दूर अगास मा उडणू छ उडन खटोला वेका पुटुग बैठ्यूँ छ कुकड़ु वु दिखणू छ ताळ वे तैं दिखेणा छन एक-दुसरै टंगड़ि खिंचदा कीड़ा-मक्वड़ा वु दिखण चाणू छ कुछ और वु अपणा आँखा झपकाँद अर बार-बार झपकाँद पर वे तैं वु नि दिख्याँद जु वेकु मन दिखण चाँद वु थक ग्या भौत लग ग्या भारि भूख पर वे तैं लगणी छ घीण कीड़ा-मक्वड़ौं देखीऽ वु ताळ नि आण चाणू छ उडन खटोला मथि, मथि और मथि उडदा जाणू छ अब वु हैंका ग्रह मा सुंदर जीवन खुज्याणू छ. Copyright © सतीश रावत 17/06/2018 Tags for Poems, Garhwali -   गढ़वळि कविता, गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems, सतीश रावत, Satish Rawat, सतीश रावत कि कविता, सतीश रावत की कविताएं, Poems of Satish Rawat, सतीश रावत कि गढ़वळि कविता, सतीश रावत की गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems of Satish Rawat, सतीश रावत, नौड़ियाल गाँव, कफोलस्यूं, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड, भारत, Satish Rawat, Nauriyal Gaon, Kapholsyun, Pauri Garhwal, Uttarakhand, India, गढ़वळि साहित्य, गढ़वाली साहित्य, Garhwali Literature, गढ़वळि साहित्य कवि, गढ़वळि साहित्य कवि, Garhwali Li...

गढ़वळि कविता, -52-, स्वाणु संसार, सतीश रावत

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-52- स्वाणु संसार क्वारा कागज पर नना नौना-बाळा खींच देंदन— रिखड़ा इना रिखड़ा जु दुनियाऽ बिंगण मा नि आँदन या दुनिया बिंगण हि नि चाँद दुनिया रिखड़ा खींची बाँट दींद दुनिया तैं अर कुंगळा हथ बनि-बनी रिखड़ौं तैं राळीऽ बणै देंदन एक स्वाणु संसार. Copyright © सतीश रावत 21/09/2018 Tags for Poems, Garhwali -   गढ़वळि कविता, गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems, सतीश रावत, Satish Rawat, सतीश रावत कि कविता, सतीश रावत की कविताएं, Poems of Satish Rawat, सतीश रावत कि गढ़वळि कविता, सतीश रावत की गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems of Satish Rawat, सतीश रावत, नौड़ियाल गाँव, कफोलस्यूं, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड, भारत, Satish Rawat, Nauriyal Gaon, Kapholsyun, Pauri Garhwal, Uttarakhand, India, गढ़वळि साहित्य, गढ़वाली साहित्य, Garhwali Literature, गढ़वळि साहित्य कवि, गढ़वळि साहित्य कवि, Garhwali Literature Poets, गढ़वळि साहित्य लेखक, गढ़वाली साहित्य लेखक, Garhwali Literature Writers, गढ़वळि कवि, गढ़वाली कवि, Garhwali Poets, गढ़वळि लेखक, गढ़वाली लेखक, Garhwali Writers, गढ़वळि भाषा, गढ़वाली भाषा,...

गढ़वळि कविता, -53-, तुम ढुँगा नि छाँ, सतीश रावत, 24/09/2018

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-53- तुम ढुँगा नि छाँ अछेकी ! तुम ढुँगा छाँ ? न, न तुम कतै ढुँगा नि छाँ ! तुमऽरा पुटुग कखि-न-कखिम जरूर होलि एक कुँगळि जिकुड़ि ज्याँकु धकध्याट तुम लुकाणा छाँ शायद अफु से भि तुम दिलाण चाणा छाँ अहसास कि तुम ढुँगा छाँ पाषाण युग तैं आधुनिक युग से तुमऽन हि त ज्वाड़ नथऽर कु नि जणदु कि कैल कै तैं नि त्वाड़ तुम हि तऽ हिमालय का गैंणा छाँ कैरन बणी तुम हि तऽ बतंद्या रस्ता डाँडि-काँठ्यूँ का पैदल यात्र्यूँ तैं पोड़ाऽ मथि धर्यां पाँच ढुँगौं तुम कित्गा स्वाणा, कित्गा सजीव छाँ तुम  ढुँगा छाँ पर, ढुँगा नि छाँ. Copyright © सतीश रावत 24/09/2018 Tags for Poems, Garhwali -  गढ़वळि कविता, गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems, सतीश रावत, Satish Rawat, सतीश रावत कि कविता, सतीश रावत की कविताएं, Poems of Satish Rawat, सतीश रावत कि गढ़वळि कविता, सतीश रावत की गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems of Satish Rawat, सतीश रावत, नौड़ियाल गाँव, कफोलस्यूं, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड, भारत, Satish Rawat, Nauriyal Gaon, Kapholsyun, Pauri Garhwal, Uttarakhand, India, गढ़वळि साहित्य, गढ़वाली साहित्य, G...

गढ़वळि कविता, -54-, लोखर, सतीश रावत, 06/12/2018

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-54-  लोखर   लोखर पिघळ जाँद—  वेका लोखर-सा हथूं तैं देखीऽ, रीति आँख्यूँ तैं देखीऽ, बग्दा पसीना तैं देखीऽ. लोखर बण जाँद—  वेकु कुंगळु मन  अर ढळ जाँद वेका हि अनुसार. कम अंक्ये जाँद जब वेकि मेहनत  तब लोखरौऽ, लोखर से होंद साक्षात्कार.  Copyright © सतीश रावत  06/12/2018  Tags for Poems, Garhwali -  गढ़वळि कविता, गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems, सतीश रावत, Satish Rawat, सतीश रावत कि कविता, सतीश रावत की कविताएं, Poems of Satish Rawat, सतीश रावत कि गढ़वळि कविता, सतीश रावत की गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems of Satish Rawat, सतीश रावत, नौड़ियाल गाँव, कफोलस्यूं, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड, भारत, Satish Rawat, Nauriyal Gaon, Kapholsyun, Pauri Garhwal, Uttarakhand, India, गढ़वळि साहित्य, गढ़वाली साहित्य, Garhwali Literature, गढ़वळि साहित्य कवि, गढ़वळि साहित्य कवि, Garhwali Literature Poets, गढ़वळि साहित्य लेखक, गढ़वाली साहित्य लेखक, Garhwali Literature Writers, गढ़वळि कवि, गढ़वाली कवि, Garhwali Poets, गढ़वळि लेखक, गढ़...

गढ़वळि कविता, -55-, मैंगु सेकेंड, सतीश रावत, 31/12/2018

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-55- मैंगु सेकेंड कबि सर्या साल रैंद कबि सर्या मैना रैंद कबि सर्या दिन रैंद कबि सर्या घंटा रैंद कबि सर्या मिनट रैंद अर कबि सालाऽ कुछ सेकेंड रंदिन हम दगड़ जु हम निपटै देंदा वु हमारु ह्वे जाँद भ्वाळ फरौ अगना रड़कि जाँद झणि कब सालौ वु मैंगु सेकेंड भि बीत जाँद फिर एक नयु साल एक सर्या साल हमतैं एक नयु अवसर दे जाँद. Copyright © सतीश रावत 31/12/2018 Tags for Poems, Garhwali -  गढ़वळि कविता, गढ़वाली कविताएं, Garhwali Poems, सतीश रावत, Satish Rawat, सतीश रावत कि कविता, सतीश रावत की कविताएं, Poems of Satish Rawat, सतीश रावत, नौड़ियाल गाँव, कफोलस्यूं, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड, भारत, Satish Rawat, Nauriyal Gaon, Kapholsyun, Pauri Garhwal, Uttarakhand, India, गढ़वळि साहित्य, गढ़वाली साहित्य, Garhwali Literature, गढ़वळि साहित्य कवि, गढ़वळि साहित्य कवि, Garhwali Literature Poets, गढ़वळि साहित्य लेखक, गढ़वाली साहित्य लेखक, Garhwali Literature Writers, गढ़वळि कवि, गढ़वाली कवि, Garhwali Poets, गढ़वळि लेखक, गढ़वाली लेखक, Garhwali Writers, गढ़वळि भाषा, गढ़वाली भाषा, Garhwali Language,...